एक मन की कैद

यह भावनात्मकज़ुल्म है जो हमें अंदर से ही जकड़ लेता है। हम खुद को बंधा हुआहैं जैसे कि एक पक्षी जो अपनीखुद की चोंच से गीत गा नहीं सकता है जो हरघेरे को देखकर खुद को एक check here दुसरे पक्षी में पाता है। यह अनुभवका बोझ ही हमें मन का गु